संतति में नर व मादा जनकों द्वारा अनुवांशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है?
उत्तर:- लैंगिक लक्षण गुणसूत्रों द्वारा वंशानुगत होते हैं। मानव में 46 गुणसूत्र होते हैं। मानव में लक्षणों की वंशागति के नियम इस बात पर आधारित हैं कि माता एवं पिता दोनों ही समान मात्रा में अनुवांशिक पदार्थ को संतति (शिशु) में स्थानांतरित करते हैं। मानव में अधिकतर गुणसूत्र माता और पिता के गुणसूत्रों के प्रतिरूप होते हैं। इनकी संख्या 22 जोड़े हैं। परंतु एक युग्म जिसे लिंग सूत्र कहते हैं, जो सदा पूर्णजोड़े में नहीं होते | स्त्री में गुणसूत्र का पूर्ण युग्म होता है तथा दोनों 'X' कहलाते हैं। लेकिन नर में यह जोड़ा परिपूर्ण जोड़ा नहीं होता, जिसमें एक गुण सूत्र सामान्य आकार का 'X' होता है तथा दूसरा गुणसूत्र छोटा होता है जिसे 'Y' गुणसूत्र कहते हैं। मानव में बच्चों के लिंग का निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें अपने पिता से किस प्रकार का गुणसूत्र प्राप्त हुआ है | सभी बच्चे चाहे वह लड़का हो अथवा लड़की, अपनी माता से 'X' गुणसूत्र प्राप्त करते हैं। जिस बच्चे को अपने पिता से 'X' गुणसूत्र वंशानुगत प्राप्त हुआ है वह लड़की एवं जिसे पिता से 'Y' गुणसूत्र वंशानुगत होता है, वह लड़का |
लैंगिक जनन में नर व मादा युग्मक से समान मात्रा में जनन पदार्थ युग्मित होकर युग्मनज बनाता है, जो अर्द्धसूत्री विभाजन के समय आधा हो जाता है| यही च हमेशा चलता रहता है|
